कांग्रेस का काम भाई-भाई को लड़ाकर राजनीति करना- चिटनीस 

कांग्रेस का काम भाई-भाई को लड़ाकर राजनीति करना- चिटनीस 
- पूर्व मंत्री अर्चना चिटनिस के नेतृत्व में भाजपा ने ज्ञापन सौंपकर की मध्यप्रदेश में सिटीजन एक्ट लागू करने की मांग
बुरहानपुर (निप्र)। मंगलवार को भारतीय जनता पार्टी द्वारा पूर्व कैबिनेट मंत्री अर्चना चिटनिस के नेतृत्व में नागरिकता संशोधन कानून को मुख्यमंत्री कमलनाथ द्वारा मध्यप्रदेश में लागू नहीं किए जाने के विरोध में कलेक्टर कार्यालय पर धरना देकर मध्यप्रदेश के राज्यपाल लालजी टंडन के नाम ज्ञापन सौंपकर इसे प्रदेश में लागू किए जाने की मांग की और कांग्रेस को खूब आड़े हाथ लिया। श्रीमती चिटनिस ने कहा कि कांग्रेस का एक ही काम है, मां के दूध में दरार डालकर राजनीति करना, भाई-भाई को लड़ाकर राजनीति करना, देश के प्रति प्रेम अपनापन उसको कमजोर करना, जो अंग्रेज करते रहे है।
पूर्व मंत्री ने कहा कि नागरिकता संशोधन कानून संविधान की भावना के अनुरूप है। मध्यप्रदेश में कांग्रेस की कमलनाथ सरकार नागरिकता संशोधन कानून लागू करने के बारे में कह रही है कि इसमें जो कांग्रेस का स्टैंड होगा वही मध्यप्रदेश सरकार फैसला लेगी। कमलनाथ जी कांग्रेस के कार्यकर्ता ही नहीं है वे मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री है। मध्यप्रदेश में सिटीजन एक्ट लागू करना ही होगा। चिटनिस ने कहा कि देश की संसद में नागरिकता संशोधन कानून को पास करने के बाद राष्ट्रपति श्री रामनाथ कोविंद  नागरिकता संशोधन विधेयक 2019 पर अपनी मुहर लगाकर इसे कानून बनाया है। आधिकारिक राजपत्र में प्रकाशित होने के साथ ही यह कानून लागू भी हो गया है। अब चूंकि यह कानून संविधान की 7वीं अनुसूची के तहत संघ की सूची में आता है, तो यह संशोधन सभी राज्यों पर लागू होता है। संविधान की 7वीं अनुसूची राज्यों और केंद्र के अधिकारों का वर्णन करती है, इसमें तीन सूचियां हैं- संघ, राज्य और समवर्ती सूची। नागरिकता संघ सूची के तहत आता है। लिहाजा इसे लेकर राज्य सरकारों के पास कोई अधिकार नहीं है। राज्य के पास ऐसा कोई भी अधिकार नहीं है कि वह केंद्र की सूची में आने वाले विषय 'नागरिकता' से जुड़ा कोई अपना फैसला कर सकें।
अर्चना चिटनिस ने कहा कि 1947 में भारत और पाकिस्तान का धार्मिक आधार पर विभाजन हुआ था। पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान का संविधान उन्हें विशिष्ट धार्मिक राज्य बनाता है। परिणामस्वरूप, इन देशों में हिंदू, सिख, बौद्ध, पारसी, जैन और ईसाई समुदायों के बहुत से लोग धार्मिक आधार पर उत्पीडऩ झेलते हैं। साल 1947 में भारत-पाक का बंटवारा धार्मिक आधार पर हुआ था। इसके बाद भी पाकिस्तान और बांग्लादेश में कई धर्म के लोग रह रहे हैं। पाक, बांग्लादेश और अफगानिस्तान में धार्मिक अल्पसंख्यक काफी प्रताडि़त किए जाते हैं। अगर वे भारत में शरण लेना चाहते हैं तो हमें उनकी मदद करने की जरूरत है। श्रीमती चिटनिस ने कहा कि राज्यों और केंद्र से सत्यापन रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद उन्हें नागरिकता दी जाएगी. भारत की नागरिकता हासिल करने के लिए देश में 11 साल निवास करने वाले लोग योग्य होते हैं। नागरिकता संशोधन बिल में बांग्लादेश, पाकिस्तान और अफगानिस्तान के शरणार्थियों के लिए निवास अवधि की बाध्यता को 11 साल से घटाकर 6 साल करने का प्रावधान है।
श्रीमती चिटनिस ने कहा कि नागरिकता (संशोधन) अधिनियम 2019, बांग्लादेश, पाकिस्तान और अफगानिस्तान में प्रताडि़त धार्मिक अल्पसंख्यकों को भारतीय नागरिकता प्रदान करने से संबंधित है। इन देशों में पिछले कई दशकों से हिन्दुओं, सिख, जैन, बौद्ध और पारसी लोगों के साथ शारीरिक एवं मानसिक उत्पीडऩ हो रहा है। इसलिए इन धर्मों के अनुयायी समय-समय परविस्थापित होकर भारत आते रहे हैं। तकनीकी तौर पर उनके पास भारत की नागरिकता हासिल करने का कोई ठोस दस्तावेज उपलब्ध नहीं होता है। एक भारतीय नागरिक को मिलने वाली सुविधाओं से वह वंचित ही रहे हैं।
इस दौरान पूर्व विधायक रामदास शिवहरे, मंजू दादू, भाजपा जिलाध्यक्ष विजय गुप्ता, महापौर अनिल भोंसले, निगमाध्यक्ष मनोज तारवाला, जगदीश कपूर, अतुल पटेल, दिलीप श्रॉफ, मुकेश शाह, मनोज लधवे, रतिलाल चिलात्रे, राजू शिवहरे, योगेश महाजन, वीरेन्द्र तिवारी, संभाजीराव सगरे, रूद्रेश्वर एंडोले, योगेश्वर पाटिल, भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा जिलाध्यक्ष हिदायतउल्ला, श्रीमती कविता सुभाष मोरे, विनोद पाटिल, संदीप मुंशी सहित सभी मंडलों के मंडलाध्यक्ष सहित पार्टी पदाधिकारियों, सभी मोर्चा के पदाधिकारी-कायकर्तागण मौजूद रहे।